पत्र बिछड़े कल के
प्रिय सखी,
मैंने तुम्हारे सहारे ही तो अपना बचपन गुज़ारा था। जब भी तुम्हारे बारे में सोचती हूँ, तो चेहरे पर एक अलग ही नूर आ जाता है। तभी तो मुझे लगता था तुमसे अधिक खूबसूरत तो इस जहान में और कोई नहीं होगा। तुम्हारी खूबसूरती तुम्हारा गुरूर बन गई थी और हो भी क्यों ना तुम्हारी सुंदरता की चर्चा तो हर कोई करता था। तुम्हारे वो रेशमी जुल्फें जिसे बस यूं ही खोल के रखा करती थी और बस इतराती रहती। जब कोई तारीफ करदे तो तुम्हारे वो गोरे गाल जो खुशी के मारे गुलाबी हो चलते थे, कभी किसिसे बेहस कर जब नाक तुम्हारी गुस्से से लाल हो जाती थी ना, आज भी वो सब जब सोचती हूं तो बस यूं ही मुस्कुरा देती हूं।
तुमसे बिछड़कर जो अकेलापन था, वो आज जीवित नहीं,
शायद इसलिए कि मैंने अपना नज़रिया बदल दिया और ज़िंदगी में आगे बढ़ गई। मगर कभी
नहीं भूल पाऊंगी तुम्हे, जो तुम्हारे जाते ही मेरी ज़िंदगी ने यू करवट ली की आज
मैं खूबसूरत के साथ साथ, एक नेक इंसान भी हूं। अब चलो ज़्यादा नहीं बोलूंगी, हम
दोनो एक दूसरे की खामोशी भली भांति समझते है। मौन आपने आप में एक कहानी बयान कर
जाति है।
- मेरे प्यारे, खूबसूरत अतीत को मेरे आज के तरफ से....


Splendid💖
ReplyDeleteAmazing!!
ReplyDeleteBahoot khoob
ReplyDeleteMast😍💯
ReplyDeleteWow💛
ReplyDelete😍😍
ReplyDeleteKya baat hai🧡♥️💜
ReplyDelete❤️❤️it's beautiful
ReplyDelete💜😍
ReplyDeleteWah wah
ReplyDeleteVery nice 👍🏻
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ReplyDeleteAmazing 🙌🏻
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ReplyDeleteWorth reading !!!!
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