सफ़र by Rushali Sarfare

"सफ़र"

जिंदगी सफ़र हैं
वो अंधेरी रातों में,
लेकर ख्वाहिशों  का कारवां
चल पड़े हैं हम,
अंजानी राहों पर।

अकेले ही सही,
माना साथ नहीं हैं कोई,
पर हैं वो चमकता सितारा,
आसमान में झिलमिलाता,
कहता हैं हमें मुस्कुराकर,

ऐ अजनबी सोचना ना तू कभी
तेरे तन्हाइयों के बारे में 
सलामत हैं तू,
अपने अरमानों के बाहों में  ।


यूं ही कोई गीत गाते जा,
उसकी धून में मग्न 
हस्ते हस्ते झूमते जा।

हवाओं की रुख को ,
अपने से सिमट लें
ये रातों को,
अपने आंखो में 
कैद कर ले।

शायद चलते चलते,
यूंही किसी लय में ,
अपने ही मौज में,
हमें पहुंचा ले वह अपनी
सुन्हेरी किरणों के स्वर्ग में।

-Rushali Sarfare 


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