आजादी by Srishti Maurya

  दुनिया से परे कुछ करने की आजादी ।।

ज़िन्दगी जीना है तो खुल के जी,

ज़िन्दगी जीना है तो खुल के जी,

पिंजरे में तो पंछी भी रह लेते है...

आज अगर खुला आसमान ना देखा तो,

आज अगर अपने पैरो की बेड़ियों को ना तोड़ा तो,

आज अगर अपने सपनों को ना याद किया तो,

वो जीना भी क्या जीना कहलाएगा...

अरे इससे अच्छा तो हम जानवर ही ठीक थे,

कम से कम अपनी मर्जी से जी तो सकते थे,

यहां तो कदम कदम पर इस समाज ने हमारे अस्तित्व को पैरो तले कुचल कर रखा है...

हां अगर तुम सही हो तो कभी चुप ना बैठना,

हां अगर तुम्हारा दिल इसकी गवाही देता है तो चुप ना बैठना,

हां अगर तुम जो कर रहे हो उसमे खुश हो तो चुप ना बैठना,

फिर चाहे दुनिया लाख रोके तुम कभी ना रुकना,

क्योंकि जिस दिन तुम्हारी उड़ान कामयाब होगी उस दिन,

उस दिन यही दुनिया तुम्हे ईश्वर की तरह पूजेगी...

-By Srishti Maurya

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