सफलता कुछ रेह गया था अधूरा जो अब पूरा करना है , बहुत देख लिया हार का मुंह अब बस जीत कर ही लौटना है। मेरे ये कदम जो डर के मारे कांपते थे, अब है मेरी यही कदम जो डर को ललकारते हैं । हर जीवन का अटल सत्य है , जीवन की नियति नहीं हार से हजार बार सीखो पर कभी हार मानना नहीं रात के अंधेरे के बाद सूरज को आना ही है , लगातार परिश्रम के बाद सफलता का मीठा फल तो चखना ही है । सफलता तेरी कदम अवश्य चूमेगी एक दिन , तू खुशी के मारे फूला ना समाऐगा, इसलिए कहती हू हार कोई अंत नहीं नई शुरूवात हैं , जीवन की हर हार से कुछ ना कुछ सीखकर आगे बढ़ते ही जाना । - By Aparna Jain