प्रिय सखी, मैंने तुम्हारे सहारे ही तो अपना बचपन गुज़ारा था। जब भी तुम्हारे बारे में सोचती हूँ, तो चेहरे पर एक अलग ही नूर आ जाता है। तभी तो मुझे लगता था तुमसे अधिक खूबसूरत तो इस जहान में और कोई नहीं होगा। तुम्हारी खूबसूरती तुम्हारा गुरूर बन गई थी और हो भी क्यों ना तुम्हारी सुंदरता की चर्चा तो हर कोई करता था। तुम्हारे वो रेशमी जुल्फें जिसे बस यूं ही खोल के रखा करती थी और बस इतराती रहती। जब कोई तारीफ करदे तो तुम्हारे वो गोरे गाल जो खुशी के मारे गुलाबी हो चलते थे, कभी किसिसे बेहस कर जब नाक तुम्हारी गुस्से से लाल हो जाती थी ना, आज भी वो सब जब सोच ती हूं तो बस यूं ही मुस्कुरा देती हूं। अब जब आज के समय पर मैं अपने बारे में सोचती हूं, तुमसे बहुत दूर, तुम्हे अपना अतीत मानकर, ज़िन्दगी में तुम्हें बहुत पीछे छोड़ दिया है - थोड़ा बुरा जरूर लगता है मगर उस बात का मलाल नहीं क्योंकि अगर तुम्हारे साथ रहती तो तुम्हारे जैसे बस सुंदरता को ही अपना आज और क ल बना लेती। आज मैं ...